इश्क़ कर के इश्क़ की दुश्वारियाँ बतलाने वालों ज़हर कैसा भी हो उस को चख के परखा जाता है क्या
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ये लम्हे मुद्दतों के बा'द आए हैं फ़क़त देखे न जाएँ ये जिए जाएँ
Yuvraj Singh Faujdar
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वो अपने हिस्से की मोहब्बत पहले ही कर चुकी किसी के साथ हम को तो बस अपना दर्द - ए - दिल बतलाने के लिए रक्खा है
Yuvraj Singh Faujdar
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दिल-परिन्दा क़फ़स में ख़ुश है अब आसमाँ बोझ लग रहा था इसे
Yuvraj Singh Faujdar
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ज़ख़्म बस भरने ही वाले थे मेरे एक ख़त फिर मिल गया उस का मुझे
Yuvraj Singh Faujdar
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हर बात को मैं शे'र में कहने का फ़न तो रखता हूँ लेकिन मियाँ हर बात कहने वाली होती ही नहीं
Yuvraj Singh Faujdar
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