jag uthe sannata aisa rag alap sath na de aawaz to phir sangit suna
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़ वरना ऐसी रौशनी करते कि दुनिया देखती
Kashif Sayyed
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
Vikram Gaur Vairagi
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ज़ीस्त में मेरे उस ने अँधेरा किया और उस को सभी 'रौशनी' कहते थे
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ये चाँद तुम्हारे मुक़ाबिल भी तो नहीं मैं तुम को देख के ईद मनाऊँगा
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ज़िंदगी भर यूँँ मेरे दिल को दुखाया था बहुत क़ब्र पर आया है वो मुझ से मुआ'फ़ी के लिए
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तुम्हें पता नहीं यहाँ कि कौन हूँ यहाँ का मैं सलाम करता है मुझे यहाँ का बादशाह भी
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शौक़ से लोगों ने तुम को ही वोट दिया क्यूँ चिढ़ते हो अब तुम यार तरक़्क़ी से
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