जो तुझ को मुझ से दूरी दे, वो बंदिश मैं तोड़ सभी, आऊंँगा तेरा होने को शरीर भी मैं छोड़ कभी
Related Sher
क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
444 likes
नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
201 likes
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
197 likes
बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
1244 likes
ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
206 likes
More from Divya 'Kumar Sahab'
तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
0 likes
हर जगह बिजली गिरा तूफ़ान ला बरसात कर लड़ भले दिन रात मुझ सेे पर मुसलसल बात कर
Divya 'Kumar Sahab'
4 likes
ये रिश्तों से बना है घर ये ईटों का मकाँ कुछ है मुझे ये छत बताती है पिता का सायबाँ कुछ है बुलंदी पर पहुँच माता पिता को छोड़ देते हैं अरे पागल धरा जब तक तभी तक आसमाँ कुछ है
Divya 'Kumar Sahab'
17 likes
ये दिल लगा जो देखने, आँखें धड़कने ये लगीं पूरी प्रणाली को यूँँ ही हम ने बिगड़ते देखा है
Divya 'Kumar Sahab'
33 likes
एक गुब्बारे की क़ीमत अब पता मुझ को चली एक गुम-सुम है खड़ा और एक रोता घर गया
Divya 'Kumar Sahab'
5 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Divya 'Kumar Sahab'.
Similar Moods
More moods that pair well with Divya 'Kumar Sahab''s sher.







