जंग मैदान-ए-जंग में होगी क़त्ल भी अब किसी को होना है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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यार की यार से जुदाई है हिज्र की याद से लड़ाई है ग़म से मेरा उदास है बिस्तर याद तेरी 'ज़फर' जो आई है
Zafar Siddqui
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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जो अदब की है पहचान पढ़ता हूँ मैं मीर-ओ-ग़ालिब का दीवान पढ़ता हूँ मैं मत पढ़ाओ मुझे पाठ नफ़रत का तुम अम्न जिस में है क़ुरआन पढ़ता हूँ मैं
Zafar Siddqui
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इश्क़ का यूँँ जवाब लेना है या'नी उस से गुलाब लेना है उस ने तोहफ़े गिना दिए हैं ज़फर अब तुझे भी हिसाब लेना है
Zafar Siddqui
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