कहो मुझ सेे बिछड़ कर भूल जाओगी बताओ भूल कर के क्या जी पाओगी है इक दिन में तुम्हारी तो ये हालत सो बिछड़ कर तो यक़ीनन मर ही जाओगी
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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परेशानी कभी मेरी बिना बोले समझ जाओ ज़बाँ से हर दफ़ा बोलूँ ज़रूरी तो नहीं है ना
AMAN RAJ SINHA
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जो देखते थे दुनिया मेरी आँखों से कभी ऑंखें वही दिखा रहे हैं मुझ को आजकल
AMAN RAJ SINHA
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फिर मुहब्बत करने की जब सोची मैं ने यार फिर हिजरत की आई याद मुझ को
AMAN RAJ SINHA
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मैं उसे जब धोखे खाते देखता हूँ सोचता हूँ बे-वफ़ाई की सज़ा तो बे-वफ़ाई होती है दोस्त
AMAN RAJ SINHA
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यूँ देख कर तुझ को यही लगता है अब मासूमियत के तू ने पर्दे ओढ़े हैं
AMAN RAJ SINHA
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