करती रही है ज़िंदगी दिल की ज़मीं उदास चेहरा कहीं उदास है आँखें कहीं उदास
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
DEVANSH TIWARI
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मेयार-ए-ज़र्फ़ तो पहचान हमारा दुश्मन भी लगता है मेहमान हमारा हम ग़ज़लें कहने वाले लड़के हैं हर नुक़्ते पर रहता है ध्यान हमारा
DEVANSH TIWARI
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सुन रहा हूँ जा रहे हो, ठीक है दूरियाँ अपना रहे हो, ठीक है कह रहे थे साथ दोगे उम्र भर बीच में ही जा रहे हो, ठीक है
DEVANSH TIWARI
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दग़ा का सोचते ही जाँ मुझ पर मेरी तस्वीर हँसने वाली थी
DEVANSH TIWARI
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इश्क़ में हद से बढ़ सकती है,बेहतर है सीप में मोती गढ़ सकती है,बेहतर है ख़ामोशी भी सुन सकती है वो लड़की मतलब आँखें पढ़ सकती है,बेहतर है
DEVANSH TIWARI
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