ख़्वाहिश हुई जो तिरे साए की तो फिर हम ने कड़ी धूप में ज़ुल्फ़ें ओढ़ लीं
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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वो जिसे तुम ने अभी फंदा कहा उस गले का श्रेष्ठ जेवर था कभी
Sibgatullah Anwer
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ये सड़क गर तुझे बेहद सताती है तो तू आ जा तुझे मैं अपने घर रख लूँ
Sibgatullah Anwer
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वो खड़ा है ग़ैर की चौखट पे जो वो हमारे दिल के अंदर था कभी
Sibgatullah Anwer
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उस की बातों में खोया न कर हर दफ़ा सिर्फ़ क़िस्से हैं कोई हक़ाइक नहीं
Sibgatullah Anwer
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वो मेरी है वो मेरी है फ़क़त मेरी ये बात सारी दुनिया को बताती है
Sibgatullah Anwer
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