कि हँस कर गुनाहों को दस्तक न दीजे ये सूरत ख़ुदा की बनाई हुई है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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साथ में मस्ज़िद का मेहमान चला जाएगा जैसे ही माहे रमज़ान चला आएगा
Irshad Siddique "Shibu"
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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी
Irshad Siddique "Shibu"
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सुनो राम तुम बाण इक और चलाओ मिटा डालो जो मन में बैठा है रावण
Irshad Siddique "Shibu"
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एक मियान में दो तलवार नहीं हो सकते सो इक काम करो तुम लौटा दो दिल मेरा
Irshad Siddique "Shibu"
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काम नहीं शैतानों का अब दुनिया में इंसानों से हैं इंसान परेशान यहाँ
Irshad Siddique "Shibu"
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