kuchh aur sabaq hum ko zamane ne sikhae kuchh aur sabaq hum ne kitabon mein padhe the
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती इतनी ख़ूब-सूरत ये ज़िंदगी नहीं होती
Hastimal Hasti
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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं
Hastimal Hasti
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खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती
Hastimal Hasti
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प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
Hastimal Hasti
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