laila ghar mein silai karne lagi qais dilli mein kaam karne laga
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरी पहली नज़र लौटा दे मुझ को तेरी जानिब दुबारा देखना है
Fahmi Badayuni
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कमरा खोला तो आँख भर आई ये जो ख़ुशबू है जिस्म थी पहले
Fahmi Badayuni
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जो मोहब्बत लुटाया करते थे वो तराज़ू ख़रीद लाए हैं
Fahmi Badayuni
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उसे ले कर जो गाड़ी जा चुकी है मैं शायद उस के नीचे आ रहा हूँ
Fahmi Badayuni
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जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल है आप पहलू से उठ नहीं सकते
Fahmi Badayuni
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