log dushman hue usi ke 'shakeb' kaam jis mehrban se nikla
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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सच बताओ कि सच यही है क्या साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या कुछ नया काम कर नई लड़की इश्क़ करना है बावली है क्या
Vikram Gaur Vairagi
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Mirza Ghalib
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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यही दीवार-ए-जुदाई है ज़माने वालो हर घड़ी कोई मुक़ाबिल में खड़ा रहता है
Shakeb Jalali
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दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है कोई मौसम हो मिरा ज़ख़्म हरा रहता है
Shakeb Jalali
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दिल सा अनमोल रतन कौन ख़रीदेगा 'शकेब' जब बिकेगा तो ये बे-दाम ही बिक जाएगा
Shakeb Jalali
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वक़्त ने ये कहा है रुक रुक कर आज के दोस्त कल के बेगाने
Shakeb Jalali
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सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में
Shakeb Jalali
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