log jis haal mein marne ki dua karte hain main ne us haal mein jine ki qasam khai hai
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मेरे पड़ोस में ऐसे भी लोग बसते हैं जो मुझ में ढूँड रहे हैं बुराइयाँ अपनी
Ameer Qazalbash
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तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो किस किस को बताओगे कि घर क्यूँँ नहीं जाते
Ameer Qazalbash
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महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास अपना ख़याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे
Ameer Qazalbash
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आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
Ameer Qazalbash
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इक परिंदा अभी उड़ान में है तीर हर शख़्स की कमान में है
Ameer Qazalbash
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