माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के लोग एक पल के लिए रुकते हैं गुज़र जाते हैं
Ahmad Faraz
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अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ
Ahmad Faraz
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वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे
Ahmad Faraz
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तू अपनी शीशागरी का हुनर न कर ज़ाया' मैं आइना हूँ मुझे टूटने की आदत है
Ahmad Faraz
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आवाज़ दे के छुप गई हर बार ज़िंदगी हम ऐसे सादा-दिल थे कि हर बार आ गए
Ahmad Faraz
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