मौसम हरदम सर्द बना सा रहता है मीठा-मीठा दर्द बना सा रहता है
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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यक़ीन उस ने दोबारा बना लिया लेकिन वो मेरे ज़ेहन से धोखा नहीं निकाल सका
Vikram Gaur Vairagi
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Shariq Kaifi
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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
Bashir Badr
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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ज़िन्दगी जीने का मतलब कुछ नहीं पर मौत भी मर्ज़ी से तो आती नहीं है
Umesh Maurya
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उस की याद न आएगी तो क्या हो जाएगा मेरा मन कोना-कोना सूना हो जाएगा
Umesh Maurya
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थकानें पाँव से चल कर बदन पर फैल जाती हैं मुसलसल ख़्वाब टूटे हैं यहाँ पर दिन निकलने में
Umesh Maurya
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वो ख़त भी साथ बूढ़ा हो गया था लिखा पर दे न पाया था उसी को
Umesh Maurya
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