mere sine mein nahin to tere sine mein sahi ho kahin bhi aag lekin aag jalni chahiye
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
Dushyant Kumar
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फिरता है कैसे-कैसे सवालों के साथ वो उस आदमी की जामा-तलाशी तो लीजिए
Dushyant Kumar
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आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख पर अँधेरा देख तू आकाश के तारे न देख
Dushyant Kumar
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यहाँ दरख़्तों के साए में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
Dushyant Kumar
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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ'
Dushyant Kumar
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