meri koshish to yahi hai ki ye masum rahe aur dil hai ki samajhdar hua jata hai
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मेरी कोशिश तो यही है कि ये मासूम रहे और दिल है कि समझदार हुआ जाता है
Vikas Sharma Raaz
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एक बरस और बीत गया कब तक ख़ाक उड़ानी है
Vikas Sharma Raaz
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अभी तो शाम की दस्तक हुई है अभी से लग गया बिस्तर हमारा यही तन्हाई है जन्नत हमारी इसी जन्नत में है अब घर हमारा
Vikas Sharma Raaz
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इरादा तो नहीं है ख़ुद-कुशी का मगर मैं ज़िंदगी से ख़ुश नहीं हूँ
Vikas Sharma Raaz
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