मुहब्बत में हम ने सियासत न की तभी इश्क़ में कोई बरकत न की उसे मानता था मैं अपना ख़ुदा कभी उस की लेकिन इबादत न की
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
More from RAJAT AWASTHI
शाख से इक फूल ख़ुद हाथों में मेरे आ गिरा जब कहा उस सेे सजाऊँँगा तुझे उन बालों में
RAJAT AWASTHI
2 likes
शिकायत मुझे थी इसी बात से कि तू ने कभी भी शिकायत न की यहाँ मैं ही तो था रियासत तेरी तू ने हम पे भी तो हुकूमत न की
RAJAT AWASTHI
4 likes
तेरा नाम जब लिख दिया रेत पर समुंदर ने फिर कोई हरकत न की
RAJAT AWASTHI
3 likes
तेरे ख़त हम छिपाते भी तो कैसे कि ग़लती इस में तो मेरी नहीं थी अलग कमरा मिला था हम को लेकिन अलग पर कोई अलमारी नहीं थी
RAJAT AWASTHI
4 likes
नहीं लगता है मन अब नौकरी में मज़ा आने लगा है शा'इरी में कमाएँगे ग़ज़ल कह कर भी अब हम गुज़ारा क्यूँ करें बस सैलरी में
RAJAT AWASTHI
5 likes
Similar Writers
Our suggestions based on RAJAT AWASTHI.
Similar Moods
More moods that pair well with RAJAT AWASTHI's sher.







