शिकायत मुझे थी इसी बात से कि तू ने कभी भी शिकायत न की यहाँ मैं ही तो था रियासत तेरी तू ने हम पे भी तो हुकूमत न की
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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शाख से इक फूल ख़ुद हाथों में मेरे आ गिरा जब कहा उस सेे सजाऊँँगा तुझे उन बालों में
RAJAT AWASTHI
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तेरा नाम जब लिख दिया रेत पर समुंदर ने फिर कोई हरकत न की
RAJAT AWASTHI
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तेरे ख़त हम छिपाते भी तो कैसे कि ग़लती इस में तो मेरी नहीं थी अलग कमरा मिला था हम को लेकिन अलग पर कोई अलमारी नहीं थी
RAJAT AWASTHI
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थोड़ा दुखी जो कल भी था, थोड़ा उदास आज हूँ ख़ुश तो नहीं हूँ मैं मगर आदमी खुशमिजाज हूँ
RAJAT AWASTHI
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नहीं लगता है मन अब नौकरी में मज़ा आने लगा है शा'इरी में कमाएँगे ग़ज़ल कह कर भी अब हम गुज़ारा क्यूँ करें बस सैलरी में
RAJAT AWASTHI
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