मुझ को तन्हाईयों में रुलाती रहो है तमन्ना कि तुम याद आती रहो
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़िन्दगी जीने का मतलब कुछ नहीं पर मौत भी मर्ज़ी से तो आती नहीं है
Umesh Maurya
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ज़ंजीरें तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है इन्सानों की ही अदला बदली होती है
Umesh Maurya
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वो जब आता था सारा घर ही भर जाता था ख़ुशियों से अकेला शख़्स ही सारे ग़मों को सोख लेता था
Umesh Maurya
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थी नदी गहरी बहुत, तूफ़ान भी था कौन टूटी नाव पर करता सवारी
Umesh Maurya
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थकानें पाँव से चल कर बदन पर फैल जाती हैं मुसलसल ख़्वाब टूटे हैं यहाँ पर दिन निकलने में
Umesh Maurya
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