मुझ को बख़्शी है तू ने ख़ुद्दारी मुफ़्लिसी दिल से शुक्रिया तेरा
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा है इश्क़ के भी आज फ़ेवर में दिखा है हो गई काफ़ूर चेहरे की कशिश भी हिज्र का ग़म उस के ज़ेवर में दिखा है
Zafar Siddqui
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तुम यक़ीं मत मशीन पर रखना पाँव अपने ज़मीन पर रखना वो ज़फ़र जाल में फँसाएगा तुम नज़र उस हसीन पर रखना
Zafar Siddqui
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जो अदब की है पहचान पढ़ता हूँ मैं मीर-ओ-ग़ालिब का दीवान पढ़ता हूँ मैं मत पढ़ाओ मुझे पाठ नफ़रत का तुम अम्न जिस में है क़ुरआन पढ़ता हूँ मैं
Zafar Siddqui
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