मुकम्मल ही नहीं होंगी मेरी ग़ज़लें मुझे मेरी ग़ज़ल जो छोड़ चल दी है
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़ौक़-ए-मोहब्बत चख लिया हम ने और जानने को कुछ नहीं है अब
Manoj Devdutt
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तुझी से बस जुदा मैं हो नहीं पाया वजह ये है ख़ुदा मैं हो नहीं पाया
Manoj Devdutt
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तन्हाई भी इक गहना है जो हर आशिक़ ने पहना है अब घर में कब रहता हूँ मैं उस के दिल में जो रहना है
Manoj Devdutt
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पटाख़ा मैं जला तो दूँगा पर धमाका कौन संभालेगा फिर
Manoj Devdutt
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नामर्द है वो मर्द दुनिया में जो हाथ बीवी पर उठाता है
Manoj Devdutt
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