sherKuch Alfaaz

मुस्करा देना अचानक कहीं मिल जाने पर और मुझे भूल न जाने का दिखावा करना

Subhan Asad46 Likes

More from Subhan Asad

तू ने सोचा भी है जानाँ कि तेरे वादे ने कितनी सदियों से नहीं पहना अमल का पैकर

Subhan Asad

18 likes

जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई

Subhan Asad

22 likes

ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ हमारे बीच ज़माने की बद-गुमानी है मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ

Subhan Asad

23 likes

जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है ज़ख़्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है उस के घर से दूर नहीं है मेरा घर रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है

Subhan Asad

24 likes

ये सानिहा भी शब-ए-हिज्र आ पड़ा हम पर तेरा ख़याल तो आया तेरी तलब न हुई

Subhan Asad

25 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Subhan Asad.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Subhan Asad's sher.