na intizar karo in ka ai aza-daro shahid jate hain jannat ko ghar nahin aate
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
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शिकायत उस से नहीं अपने आपसे है मुझे वो बे-वफ़ा था तो मैं आस क्यूँँ लगा बैठा
Sabir Zafar
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सुब्ह की सैर की करता हूँ तमन्ना शब भर दिन निकलता है तो बिस्तर में पड़ा रहता हूँ
Sabir Zafar
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शाम से पहले तिरी शाम न होने दूँगा ज़िन्दगी मैं तुझे नाकाम न होने दूँगा
Sabir Zafar
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वो क्यूँँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी
Sabir Zafar
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