na puchhiye ki wo kis karb se guzarte hain jo aagahi ke sabab aish-e-bandagi se gae
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये कैसे मलबे के नीचे दबा दिया गया हूँ मुझे बदन से निकालो मैं तंग आ गया हूँ
Irfan Sattar
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नहीं नहीं मैं बहुत ख़ुश रहा हूँ तेरे बग़ैर यक़ीन कर कि ये हालत अभी अभी हुई है
Irfan Sattar
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किसी आहट में आहट के सिवा कुछ भी नहीं अब किसी सूरत में सूरत के सिवा क्या रह गया है
Irfan Sattar
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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ख़ुशबू था मैं बिखरना मेरा इख़्तिसास था इन ज़िम्मेदारियों ने इकट्ठा किया मुझे
Irfan Sattar
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