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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है

Zubair Ali Tabish

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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना

Ali Zaryoun

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

Ashraf Jahangeer

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मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उस के इक इशारे पर मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है

Rahat Indori

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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या

Ankita Singh

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