पलकें कैसे बंद करोगे आँखों में अरमाँ बैठे हैं दस्तक देकर वापस आओ उन के घर मेहमाँ बैठे हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ये कहने की इजाज़त चाहिए थी हमें थोड़ी रियायत चाहिए थी सज़ा का हुक्म सर आँखों पे है बस हमें थोड़ी सी मोहलत चाहिए थी
Anshika Shukla
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ख़ौफ़ खाता है क्यों ज़माने का तुझे तो फ़न है आज़माने का हया की हुस्न पर हुकूमत है है ये कलमा किसी दिवाने का
Anshika Shukla
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हर इक शाम अपनी हदें तोड़कर के ये दोनों किनारे किधर जा रहे हैं
Anshika Shukla
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वो जिस हमदर्द को आँसू मिरे अश'आर लगते थे उसी बे-दर्द को मेरी हँसी अच्छी नहीं लगती
Anshika Shukla
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ज़िंदगी हमक़दम रही लेकिन वक़्त से हमक़दम नहीं होती
Anshika Shukla
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