हर इक शाम अपनी हदें तोड़कर के ये दोनों किनारे किधर जा रहे हैं
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ौफ़ खाता है क्यों ज़माने का तुझे तो फ़न है आज़माने का हया की हुस्न पर हुकूमत है है ये कलमा किसी दिवाने का
Anshika Shukla
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चाँद जुगनू से लड़ रहा है क्यूँ चाँद में ख़ुद की रौशनी है क्या
Anshika Shukla
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ज़िंदगी हमक़दम रही लेकिन वक़्त से हमक़दम नहीं होती
Anshika Shukla
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इश्क़ वहशत कैफ़ियत और कुछ किताबें बस इन्हीं से ज़िंदगानी चल रही है
Anshika Shukla
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आप के सिम्त से जाने की तमन्ना तो नहीं फ़िक्र मत करिए चले जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता
Anshika Shukla
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