रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान
Nida Fazli
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मेरे अंदर से आ जाओ बाहर गहमा-गहमी है एक बदन में दो लोगों को कैसे घर ले जाऊँगा
nakul kumar
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
Jaun Elia
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अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता वो देखो एक औरत आ रही है
Shakeel Jamali
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सियासत के चेहरे पे रौनक़ नहीं ये औरत हमेशा की बीमार है
Shakeel Jamali
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वो अपने ख़ून से लिखने लगी है नाम मेरा अब इस मज़ाक़ को संजीदगी से लेना है
Shakeel Jamali
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कुछ लोग हैं जो झेल रहे हैं मुसीबतें कुछ लोग हैं जो वक़्त से पहले बदल गए
Shakeel Jamali
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लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं इश्क़ में इतना ख़सारा है तो घर जाते हैं
Shakeel Jamali
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