रो रो के कह रही है धनक धिन धनक धनक इक साज़ तेरे लम्स से जो आश्ना नहीं
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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इक मसीहा जन्म लेने जा रहा है मरयमों के हाथ काटे जा रहे हैं
Abdulla Asif
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ये बंदगी के नताइज नहीं जो ख़ुश हैं हम वो चाहता ही नहीं था कि मुश्किलें आएँ
Abdulla Asif
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ज़हर ने उस को ज़िंदगी दे दी वरना सुकरात मर गया होता
Abdulla Asif
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वहाँ पे जाके क़दम डगमगाने लगते हैं इसी लिए तो बुलंदी पे मैं नहीं जाता
Abdulla Asif
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एक फ़न है बिखर जाना और मैं उस्ताद हूँ इस में
Abdulla Asif
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