वहाँ पे जाके क़दम डगमगाने लगते हैं इसी लिए तो बुलंदी पे मैं नहीं जाता
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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एक फ़न है बिखर जाना और मैं उस्ताद हूँ इस में
Abdulla Asif
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ये बंदगी के नताइज नहीं जो ख़ुश हैं हम वो चाहता ही नहीं था कि मुश्किलें आएँ
Abdulla Asif
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उदासियों के समुंदर में डूब जाता मैं जो कहकहा न लगाता तो और क्या करता
Abdulla Asif
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ज़हर ने उस को ज़िंदगी दे दी वरना सुकरात मर गया होता
Abdulla Asif
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ये सच है राज़िक़-ए-कुल एक बस अल्लाह है लेकिन बिना मेहनत मशक्कत के किसी को कुछ नहीं देता
Abdulla Asif
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