सादगी मुझ में नहीं, इंसान मैं भी हूँ हरामी हाथ हो तेरा मिलाना झूठ, फ़र्ज़ी हो मिरा भी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
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ज़िंदा रहा मैं आज भी यारों ग़ज़ब की बात है मज़लूम है बख़्शा गया क्या ख़ूब-सूरत रात है
Zain Aalamgir
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ये शहर शोर-शराबा बहुत सुनाता है मगर पुकारूँ किसे तो सुकूत काफ़ी है
Zain Aalamgir
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ये दिल फिर हम किस सेे लगाएँगे जब दिल से किनारा कर आएँगे
Zain Aalamgir
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तुम दर-दरीचे बंद करते, के न आ कोई सके लेकिन बना चाबी रखी है मौत आने वास्ते
Zain Aalamgir
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