शाम-ए-ग़म करवट बदलता ही नहीं वक़्त भी ख़ुद्दार है तेरे बग़ैर
Related Sher
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
298 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
More from Shakeel Badayuni
क़ैद से छूट के भी क्या पाया आज भी पाँव में ज़ंजीर तो है
Shakeel Badayuni
15 likes
मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया
Shakeel Badayuni
11 likes
वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं मगर बात करने को जी चाहता है जहाँ इश्क़ में डूब कर रह गए हैं वहीं फिर उभरने को जी चाहता है
Shakeel Badayuni
14 likes
तिरे बग़ैर अजब बज़्म-ए-दिल का आलम है चराग़ सैंकड़ों जलते हैं रौशनी कम है
Shakeel Badayuni
21 likes
क्या ख़ुशी में ज़िंदगी का होश कम रह जाएगा ग़म अगर मिट भी गया एहसास-ए-ग़म रह जाएगा
Shakeel Badayuni
25 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shakeel Badayuni.
Similar Moods
More moods that pair well with Shakeel Badayuni's sher.







