शाख से इक फूल ख़ुद हाथों में मेरे आ गिरा जब कहा उस सेे सजाउँगा तुझे उन बालों में
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरा नाम जब लिख दिया रेत पर समुंदर ने फिर कोई हरकत न की
RAJAT AWASTHI
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शिकायत मुझे थी इसी बात से कि तू ने कभी भी शिकायत न की यहाँ मैं ही तो था रियासत तेरी तू ने हम पे भी तो हुकूमत न की
RAJAT AWASTHI
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थोड़ा दुखी जो कल भी था, थोड़ा उदास आज हूँ ख़ुश तो नहीं हूँ मैं मगर आदमी खुशमिजाज हूँ
RAJAT AWASTHI
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शाख से इक फूल ख़ुद हाथों में मेरे आ गिरा जब कहा उस सेे सजाऊँँगा तुझे उन बालों में
RAJAT AWASTHI
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रूठता क्यूँ मेरा हम-सफर अब नहीं क्या मनाने का मुझ में हुनर अब नहीं अपनी आँखों से रुख़सत तू ने किया इस बेघर को मिलेगा वो घर अब नहीं
RAJAT AWASTHI
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