शाइरों से शा'इरी को तुम बचाओ शाइरों शा'इरी के नाम पे, बू मत मचाओ शाइरों
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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मौक़ा मिल जाए तो ज़ोन नहीं मिलता डूबोगे, उल्फ़त में लोन नहीं मिलता ये लड़कियों का एक बहाना होता है माँ घर पे रहती है फोन नहीं मिलता
Vijay Potter Singhadiya
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यार पूरा कैसे मेरा प्यार होता प्यार का तो नाम ही पूरा नहीं है
Vijay Potter Singhadiya
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इक मतला इक ताज़ा शे'र सुना लेते हैं बेकारी है तो अब लोग मज़ा लेते हैं शे'र तो क्या तुम यार ग़ज़ल ही चुरा लो मेरी वालिद का जूठा तो बच्चे खा लेते हैं
Vijay Potter Singhadiya
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शे'र अच्छा तो नहीं है दोस्त पर तेरे चेहरे पे ख़ुशी तो आ गई
Vijay Potter Singhadiya
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भूखे को तू जल पान कराया कर मज़हब से ऊपर भी उठ जाया कर मैं मन्दिर जाता हूँ तेरे ख़ातिर तू भी मस्जिद में नीर चढ़ाया कर
Vijay Potter Singhadiya
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