शे'र ग़ज़ल गढ़ना है काम मियाँ पानी लिखना पानी पर रात उला खाए तो दिन गुज़रे मतला, मक़ता, सानी पर
Related Sher
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
267 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Mirza Ghalib
85 likes
रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
112 likes
ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
101 likes
More from Sandeep dabral 'sendy'
उतर रहे हैं कुछ किरदार मिरे दिल से धीरे धीरे बदल रहे हैं कुछ जाहिल में काबिल से धीरे धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
तुम्हारे बा'द आए हैं बहुत सारे मगर दिल को न भाए हैं यहाँ कोई
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
उस को भी कोई छोटा-मोटा रहज़न घोषित करवा दो मालूम नहीं है कितनों को मुस्कान से लूटा है अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
उस के झुमके औ बाली फिर से नाराज़ न हो जाएँ नज़र हटाई हम ने ठोड़ी के तिल से धीरे धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
उस का बोसा पाकर झुमके याँ हर-दम क्यूँ इठलाते हैं बोसा पाकर सोचा हम ने इतना कम क्यूँ इठलाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sandeep dabral 'sendy'.
Similar Moods
More moods that pair well with Sandeep dabral 'sendy''s sher.







