sunate ho kise ahwal 'mahir' wahan to muskuraya ja raha hai
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किसे फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल है ये सवाल है कोई वक़्त है भी कि जाल है ये सवाल है
Abbas Qamar
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किसे है वक़्त मोहब्बत में दर-ब-दर भटके मैं उस के शहर गया था किसी ज़रूरत से
Riyaz Tariq
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गिरेगी कौन सी छत पे ये कब किसे मालूम कटी पतंग हवाओं के इम्तिहान में है
Ghani Ejaz
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पहले-पहल थोड़ी तो मुश्किल जाएगी पर दिल की बगिया फिर से खिल जाएगी गर तुझ को मुझ सेे अच्छा मिल सकता है तो मुझ को तुझ सेे अच्छी मिल जाएगी
Vijay Anand Mahir
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इस ज़िन्दगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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ये हवाओं की संगत का फल था कि अब आइने में नहीं दिखता मेरा बदन
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तुम ने उन को मार गिराया वो भी तो तुम को मारेंगे
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ये चंद बे-जान से ही अश'आर हैं मिरे प्यार के ख़ातिर मिरी ग़ज़ल एक बेवा के आँसुओं में इस तरह डूबी है
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तुम ने मेरा यक़ीं किया था हाँ याद आया नहीं किया था अश्कों की क़ब्र है जहाँ पर मैं ने सज्दा वहीं किया था
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