तन पर रंग चढ़ाती होली या फिर भंग पिलाती होली होली सारे भेद मिटाए सम रस ढंग बढ़ाती होली
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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ये ख़ुदा तू तो ये जानता है कितने तरसे हैं इक शख़्स को हम
Jitendra "jeet"
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सब को जीने का यूँँ ढब नहीं आएगा आना जब चाहिए तब नहीं आएगा व्यर्थ ही जाएगा राह तकना तेरा जो गया सो गया अब नहीं आएगा
Jitendra "jeet"
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मैं तो अब शाम का ढलते सूरज सा हूँ तुम मेरी ज़िन्दगी का उजाला बनो मैं इबादत करूँँ हर घड़ी हर पहर तुम मेरी बंदगी तुम शिवाला बनो
Jitendra "jeet"
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जानते हो कि तुम ज़िन्दगी हो मेरी तुम ग़ज़ल गीत और शा'इरी हो मेरी वक़्त रहते उठा लीजिए फोन को क्या पता कॉल ये आख़िरी हो मेरी
Jitendra "jeet"
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नहीं है चाह जिस्मों की न दौलत चाहिए तेरी मिले दिल में जगह तेरे वहीं दुनिया बसा लूँगा
Jitendra "jeet"
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