तसल्ली ठिकानों पे मिलती नहीं है बहुत हार के आज घर जा रहे हैं
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ख़ौफ़ खाता है क्यों ज़माने का तुझे तो फ़न है आज़माने का हया की हुस्न पर हुकूमत है है ये कलमा किसी दिवाने का
Anshika Shukla
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वो जिस हमदर्द को आँसू मिरे अश'आर लगते थे उसी बे-दर्द को मेरी हँसी अच्छी नहीं लगती
Anshika Shukla
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ज़िंदगी हमक़दम रही लेकिन वक़्त से हमक़दम नहीं होती
Anshika Shukla
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तेरा मेआ'र तो अपनी जगह है मगर बीमार तो अपनी जगह है बहुत कुछ लुट चुका है इस शहर से अभी बाज़ार तो अपनी जगह है
Anshika Shukla
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क्या होता है ख़ामोशी में रहने से अपना हाल सुनाने से क्या होता है
Anshika Shukla
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