तेरे दिल की इक ये बस्ती पहले उस इक राजा की थी जिस ने तेरे नाम पर जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी क्या हुआ जो आपने रातों की नींदें मार डाली हम ने भी राहत व नुसरत सुनके यादें ताज़ा की थी
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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यहाँ अब कौन दिल का कायल है ,बता हाँ कुछ लिबास होते तो कुछ बात थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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गले मिलना था मुझ को आज तुम सेे मगर तुम भी ख़ुदा से जा मिले हो
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार अब तो काफ़ी ज़्यादा सज गई हो फिर भी तुम को हम पुरानी लिख रहे हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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ना आँखें, ना बातें, ना साँसे, ना ही दिल हाँ लेकिन मिलाओ कभी हाथ हम सेे
"Nadeem khan' Kaavish"
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