तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा मैं वो चमन जो बहाराँ के इंतिज़ार में है
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
Tehzeeb Hafi
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उस की तस्वीरें हैं दिलकश तो होंगी जैसी दीवारें हैं वैसा साया है एक मैं हूँ जो तेरे क़त्ल की कोशिश में था एक तू है जो जेल में खाना लाया है
Tehzeeb Hafi
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं पेड़ का रूप धार लूँगा मैं तू निशाने पे आ भी जाए अगर कौन सा तीर मार लूँगा मैं
Tehzeeb Hafi
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत मज़ा तो जब है कि यारों के रू-ब-रू कहिए
Ali Sardar Jafri
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