तू ये समझता है कि कोई दुख नहीं हमें तुझ सेे जो चार बात हँस के बोलते हैं हम
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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हम लोग चूंकि दश्त के पाले हुए हैं सो ख़्वाबों में चाहे झील हों, आँखों में पेड़ हैं
Siddharth Saaz
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तन्हा कब तक बात करूँँगा मैं तू भी मुझ सेे बात किया कर दोस्त
Siddharth Saaz
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
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और आसान नहीं हो सकता फ़रियादों को पूरा करना एक ही आस लगा रक्खी है, ख़ुदा सभी बंदों ने तुझ सेे
Siddharth Saaz
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मिलेगी क़ैद से कैसे रिहाई कौन सोचेगा यहाँ तेरे सिवा तेरी भलाई कौन सोचेगा ज़माने भर का तू सोचेगा तो फिर तेरे बारे में मुझे तू ही बता दे मेरे भाई, कौन सोचेगा?
Siddharth Saaz
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