sherKuch Alfaaz

tumhaara husn aaraish tumhaari sadgi zewar tumhein koi zarurat hi nahin banne sanwarne ki

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

Jaun Elia

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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी

Vikram Gaur Vairagi

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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी

Aalok Shrivastav

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न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है

Adil Farooqui

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बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले ये हुस्न की दौलत है लुटाई नहीं जाती

Unknown

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