un labon ne na ki masihai hum ne sau sau tarah se mar dekha
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ आख़िर को हार हार के बरसात रह गई
Khwaja Meer Dard
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मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े मिरी याद तुझ को दिलाता रहेगा
Khwaja Meer Dard
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ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले
Khwaja Meer Dard
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तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें
Khwaja Meer Dard
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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