वक़्त की धारा ने बदला है उसे ये जो दरिया है समुंदर था कभी
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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रुक गया दरिया समुन्दर बह गया और फिर आख़िर हिमालय ढह गया
nakul kumar
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये सड़क गर तुझे बेहद सताती है तो तू आ जा तुझे मैं अपने घर रख लूँ
Sibgatullah Anwer
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वो खड़ा है ग़ैर की चौखट पे जो वो हमारे दिल के अंदर था कभी
Sibgatullah Anwer
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तेरी आँखों से बहते-बहते ही इक दिन मैं ने दरिया हो जाना है
Sibgatullah Anwer
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वो जिसे तुम ने अभी फंदा कहा उस गले का श्रेष्ठ जेवर था कभी
Sibgatullah Anwer
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महफ़िल में अपनी उस को बुलाता रहा हूँ मैं फिर उस को अपने शे'र सुनाता रहा हूँ मैं
Sibgatullah Anwer
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