sherKuch Alfaaz

वतन की साख है अब दाँव पर तो लगा देना जियाला जाँ की बाज़ी

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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं

Tehzeeb Hafi

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उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी

nakul kumar

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

Ali Zaryoun

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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे कब कहा है गले लगाओ मुझे तुम को नुस्ख़ा भी लिख के दे दूँगा ज़ख़्म तो ठीक से दिखाओ मुझे

Zia Mazkoor

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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है

Pratap Somvanshi

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वादों से मुकर जाना तो फ़ितरत है तुम्हारी कुछ और नया खेल दिखाओ तो बने बात

Nityanand Vajpayee

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उन के शयनांगन से बिल्कुल सटकर स्वर्ग बसा होगा रूप-जलधि से उन के भर-भर देव सुधाघट पीते हैं स्रोत सभी औषधि-लेपों का है उन की कोमलता में देव दनुज सब युद्ध-व्रणों को उन हाथों से सीते हैं

Nityanand Vajpayee

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मैं ने देखी है ज़माने की हक़ीकत इन से अब ये आँखें मेरी धोखा नहीं खाने वाली

Nityanand Vajpayee

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शिकस्त-याब को तमगा इसे मैं क्या समझूँ अजीब-तर है ये कुनबा इसे मैं क्या समझूँ मियाँ दिमाग़ में क्या कुछ है केमिकल लोचा शिकस्त-ए-फ़ाश पे जलसा इसे मैं क्या समझूँ

Nityanand Vajpayee

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मिलन मुमकिन बनाने की जुगत कुछ तो बताएँ आप अकेले किस क़दर भीगूँ मैं सावन भर चले आते

Nityanand Vajpayee

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