यार बूँद-ए-अश्क गिरने से ज़रा पहले तू आना मुंतज़िर रख फिर किनारा ये समुंदर का बनेगा
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़िंदा रहा मैं आज भी यारों ग़ज़ब की बात है मज़लूम है बख़्शा गया क्या ख़ूब-सूरत रात है
Zain Aalamgir
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ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
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वक़्त गुज़रा नहीं यहाँ, समझो है गुज़ारा गया यहाँ हम सेे
Zain Aalamgir
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वही मंज़र कि बाशिंदा कभी घर जा नहीं पाया लगे ख़ाली मगर घर में भरा भंडार ख़ालीपन
Zain Aalamgir
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वो क्या अगर सब गुफ़्तगू खुद सेे किए हम जा रहे ना दिख बुतों में और ना ही दिख फ़लक में वो ख़ुदा
Zain Aalamgir
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