यूँँ दर्द-ए-जुदाई में जीने से तो बेहतर है दरिया में उतर जाना दुनिया से गुज़र जाना
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मैं तन्हा सर-ए-राह खड़ा सोच रहा हूँ तन्हाई मिटाने के लिए जाऊँ कहाँ पर वो बे-वफ़ा तो लौट के आने से रहा अब तू ही बता ऐ दिल तुझे बहलाऊँ कहाँ पर
Saif Dehlvi
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भूलने वाले तिरे सर की क़सम शाम के बा'द याद कर कर के तुझे रोते हैं हम शाम के बा'द
Saif Dehlvi
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तुम इन्तिज़ार तो कर दोगे ख़त्म आ के मगर न कर सकोगे अदा मेरे इन्तिज़ार का हक़
Saif Dehlvi
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ता-उम्र तिरे पास ये बैठे न रहेंगे नादाँ तू बुज़ुर्गों को ज़रा वक़्त दिया कर
Saif Dehlvi
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हम घर से तो चले थे किसी और काम को फिर यूँँ हुआ कि उन की गली याद आ गई
Saif Dehlvi
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