ज़ुदा हम हो गए अफ़सोस कैसा फ़लक धरती से कब लिपटा दिखा है
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सुना है मरते नहीं प्यार में अनारकली तो कैसा लगता है दीवार में अनारकली?
Idris Babar
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इंसान को ही अक़्ल ये आना तो है नहीं धरती के ही अलावा ठिकाना तो है नहीं भर लो सिलेंडरों में जहाँ भर की ऑक्सीजन तुम को मगर दरख़्त लगाना तो है नहीं
Gagan Bajad 'Aafat'
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गिरते पड़ते हुए हर शख़्स सँभल जाता है मसअला कुछ भी हो हल उस का निकल जाता है यूँँ न घबरा मेरे मन वक़्त की चालाकी से वक़्त कैसा भी हो इक दिन वो बदल जाता है
Daqiiq Jabaalii
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तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
Mehshar Afridi
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फ़लक इतना सूना है क्यूँ ज़मीं पर तो सब मेरे थे
Parul Singh "Noor"
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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सब विदाई के वक़्त रोते हैं सोच उस वक़्त हँस रहा था मैं
Atul K Rai
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नया पंचाँग टँग जाएगा घर में गुज़रते ही पुराना साल प्यारे
Atul K Rai
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नदी उस पार के साथी अकेले रो रहे होंगे निकल लेते हैं चल भाई अभी सब सो रहे होंगे बिछड़ने के दुखों पर ये ख़ुशी मरहम लगाएगी जो पागल कह रहे थे अब वो पागल हो रहे होंगे
Atul K Rai
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नई पीढ़ी को आख़िर कौन कल रस्ता दिखाएगा बग़ीचे में पुराने पेड़ का होना ज़रूरी है
Atul K Rai
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