bahar bhi ab andar jaisa sannata hai dariya ke us paar bhi gahra sannata hai shor thame to shayad sadiyan biit chuki hain ab tak lekin sahma sahma sannata hai kis se bolun ye to ik sahra hai jahan par main huun ya phir gunga bahra sannata hai jaise ik tufan se pahle ki khamoshi aaj miri basti men aisa sannata hai nai sahar ki chaap na jaane kab ubhregi charon janib raat ka gahra sannata hai soch rahe ho socho lekin bol na padna dekh rahe ho shahr men kitna sannata hai mahv-e-khvab hain saari dekhne vaali ankhen jagne vaala bas ik andha sannata hai darna hai to an-jani avaz se darna ye to 'anis' dekha-bhala sannata hai bahar bhi ab andar jaisa sannata hai dariya ke us par bhi gahra sannata hai shor thame to shayad sadiyan bit chuki hain ab tak lekin sahma sahma sannata hai kis se bolun ye to ek sahra hai jahan par main hun ya phir gunga bahra sannata hai jaise ek tufan se pahle ki khamoshi aaj meri basti mein aisa sannata hai nai sahar ki chap na jaane kab ubhregi chaaron jaanib raat ka gahra sannata hai soch rahe ho socho lekin bol na padna dekh rahe ho shahr mein kitna sannata hai mahw-e-khwab hain sari dekhne wali aankhen jagne wala bas ek andha sannata hai darna hai to an-jaani aawaz se darna ye to 'anis' dekha-bhaala sannata hai
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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वो मेरे हाल पे रोया भी मुस्कुराया भी अजीब शख़्स है अपना भी है पराया भी ये इंतिज़ार सहर का था या तुम्हारा था दिया जलाया भी मैं ने दिया बुझाया भी मैं चाहता हूँ ठहर जाए चश्म-ए-दरिया में लरज़ता अक्स तुम्हारा भी मेरा साया भी बहुत महीन था पर्दा लरज़ती आँखों का मुझे दिखाया भी तू ने मुझे छुपाया भी बयाज़ भर भी गई और फिर भी सादा है तुम्हारे नाम को लिक्खा भी और मिटाया भी
Aanis Moin
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वो कुछ गहरी सोच में ऐसे डूब गया है बैठे बैठे नदी किनारे डूब गया है आज की रात न जाने कितनी लंबी होगी आज का सूरज शाम से पहले डूब गया है वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था पानी पानी कहते कहते डूब गया है मेरे अपने अंदर एक भँवर था जिस में मेरा सब कुछ साथ ही मेरे डूब गया है शोर तो यूँँ उट्ठा था जैसे इक तूफ़ाँ हो सन्नाटे में जाने कैसे डूब गया है आख़िरी ख़्वाहिश पूरी कर के जीना कैसा 'आनस' भी साहिल तक आ के डूब गया है
Aanis Moin
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बाहर भी अब अंदर जैसा सन्नाटा है दरिया के उस पार भी गहरा सन्नाटा है शोर थमें तो शायद सदियाँ बीत चुकी हैं अब तक लेकिन सहमा सहमा सन्नाटा है किस से बोलूँ ये तो इक सहरा है जहाँ पर मैं हूँ या फिर गूँगा बहरा सन्नाटा है जैसे इक तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी आज मिरी बस्ती में ऐसा सन्नाटा है नई सहर की चाप न जाने कब उभरेगी चारों जानिब रात का गहरा सन्नाटा है सोच रहे हो सोचो लेकिन बोल न पड़ना देख रहे हो शहर में कितना सन्नाटा है महव-ए-ख़्वाब हैं सारी देखने वाली आँखें जागने वाला बस इक अंधा सन्नाटा है डरना है तो अन-जानी आवाज़ से डरना ये तो 'आनिस' देखा-भाला सन्नाटा है
Aanis Moin
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