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jiine ke un ke saath bahane chale gae uth kar gae vo yuun ki zamane chale gae ehsas jin ke hone se hone ka tha kabhi un be-gharon ke saare thikane chale gae karna yahan pe kya tha magar kar rahe hain kya ham kya karen ki apne siyane chale gae jo paas the to qissa bhi kya dil-fareb tha kholi jo ab kitab fasane chale gae raunaq to chaar su hai magar muflison ko kya khali hain un ki jeben khazane chale gae tapta hai aftab to jalti hai ye zamin mausam bhi un ke saath suhane chale gae hasid samajh na liije yunhi sochta huun main ab vo na jaane kis ko rijhane chale gae 'abrak' mohabbaton men na da've kiya karen kyuun khud na aap un ko manane chale gae jine ke un ke sath bahane chale gae uth kar gae wo yun ki zamane chale gae ehsas jin ke hone se hone ka tha kabhi un be-gharon ke sare thikane chale gae karna yahan pe kya tha magar kar rahe hain kya hum kya karen ki apne siyane chale gae jo pas the to qissa bhi kya dil-fareb tha kholi jo ab kitab fasane chale gae raunaq to chaar su hai magar muflison ko kya khali hain un ki jeben khazane chale gae tapta hai aaftab to jalti hai ye zamin mausam bhi un ke sath suhane chale gae hasid samajh na lije yunhi sochta hun main ab wo na jaane kis ko rijhane chale gae 'abrak' mohabbaton mein na da'we kiya karen kyun khud na aap un ko manane chale gae

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अब मेरे साथ नहीं है समझे ना समझाने की बात नहीं है समझे ना तुम माँगोगे और तुम्हें मिल जाएगा प्यार है ये ख़ैरात नहीं है समझे ना मैं बादल हूँ जिस पर चाहूँ बरसूँगा मेरी कोई ज़ात नहीं है समझे ना अपना ख़ाली हाथ मुझे मत दिखलाओ इस में मेरा हाथ नहीं है समझे ना

Zubair Ali Tabish

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अभी इक शोर सा उठा है कहीं कोई ख़ामोश हो गया है कहीं है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं तुझ को क्या हो गया कि चीज़ों को कहीं रखता है ढूँढ़ता है कहीं जो यहाँ से कहीं न जाता था वो यहाँ से चला गया है कहीं आज शमशान की सी बू है यहाँ क्या कोई जिस्म जल रहा है कहीं हम किसी के नहीं जहाँ के सिवा ऐसी वो ख़ास बात क्या है कहीं तू मुझे ढूँड मैं तुझे ढूँडूँ कोई हम में से रह गया है कहीं कितनी वहशत है दरमियान-ए-हुजूम जिस को देखो गया हुआ है कहीं मैं तो अब शहर में कहीं भी नहीं क्या मिरा नाम भी लिखा है कहीं इसी कमरे से कोई हो के विदाअ'' इसी कमरे में छुप गया है कहीं मिल के हर शख़्स से हुआ महसूस मुझ से ये शख़्स मिल चुका है कहीं

Jaun Elia

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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सच बताएँ तो शर्म आती है और छुपाएँ तो शर्म आती है हम पे एहसान हैं उदासी के मुस्कुराएँ तो शर्म आती है हार की ऐसी आदतें हैं हमें जीत जाएँ तो शर्म आती है उस के आगे ही उस का बख़्शा हुआ सर उठाएँ तो शर्म आती है ऐश औकात से ज़्यादा की अब कमाएँ तो शर्म आती है धमकियाँ ख़ुद-कुशी की देते हैं कर न पाएँ तो शर्म आती है

Varun Anand

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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